19 अक्टूबर 1911 को रुदौली (फैजाबाद) में असरारुल हक मजाज का जन्म हुआ। वे उर्दू के प्रगतिशील विचारधारा से जुड़े रोमानी शायर के रूप में प्रसिद्ध हुए। लखनऊ से जुड़े होने से वे मजाज लखनवी के नाम से भी प्रसिद्ध हुए। आरंभिक उपेक्षा के बावजूद कम लिखकर भी उन्होंने बहुत अधिक प्रसिद्धि पायी।
असरारुल हक़ मजाज की कविता में रोमांस और क्रांति का मिश्रण है। उनकी रचनाएँ प्यार और नाकामियों के दुखद चित्रण के साथ-साथ समाज के अन्याय, गरीबी और पूँजीवाद के खिलाफ एक सशक्त आवाज भी हैं। किसी आलोचक ने उन्हें उर्दू का कीट्स भी कहा है। कीट्स अंग्रेजी के महानतम कवि हुए हैं। यहां पेश है मजाज की एक रचना –
बोल! अरी ओ धरती बोल!
राज सिंघासन डाँवाडोल
नामी और मशहूर नहीं हम
लेकिन क्या मजदूर नहीं हम
धोका और मजदूरों को दें
ऐसे तो मजबूर नहीं हम
मंजिल अपने पाँव के नीचे
मंजिल से अब दूर नहीं हम
बोल! अरी ओ धरती बोल!
राज सिंघासन डाँवाडोल
बोल कि तेरी खिदमत की है
बोल कि तेरा काम किया है
बोल कि तेरे फल खाए हैं
बोल कि तेरा दूध पिया है
बोल कि हम ने हश्र उठाया
बोल कि हम से हश्र उठा है
बोल कि हम से जागी दुनिया
बोल कि हम से जागी धरती
बोल! अरी ओ धरती बोल!
राज सिंघासन डाँवाडोल।
-असरारुल हक मजाज













